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darjeling ke swad by parul anand

darjeling ke swad by parul anand

दार्जिलिंग के स्वाद

 

दार्जिलिंग को भले ही बसाया अंग्रेज़ो ने पर उसे निखारा बंगाली ज़मीदारो ने और तिब्बतियों ने | अंग्रेज़ो तो चले गए , लेकिन बेकिंग की पड़ितहि अभी भी यही है | इसलिए यहाँ कुछ खाने की जगह ऐसी है , जहाँ अंग्रेज़ों की छाप आज भी मिलती है | अगर आप कुछ बेहतरीन बेकरी आइटम्स खाना चाहते है , तो गलारेन्स बेकरी ज़रूर जाये | यहाँ एप्पल पाई , चॉक्लेट रोल , कूकीज और चॉक्लेट ज़रूर तरय करें | एक रेस्टोरेंट है केवेंटर्स जिसकी खुली छत पर बैठ कर अपने खाने का लुफ्त ले सकते है | अगर आप नॉन-वेज के शौक़ीन है तो यहाँ कुछ मीट की वैरायटी खाने को मिलेगी |

 

सुबह का नाश्ता यहाँ ज़रूर करना चाहिए | इस नाश्ते का खास हिस्सा होता है , चीटर चीज़ जो की नज़दीक के शहर कलिंगपोंग से आता है | केवेंटर्स अपने फ्लावोरेड मिल्क शेक्स के लिए भी मशहूर है , | वैसे यहाँ बतासिया लूप पर कई bhotiya लोग लोकल फ़ूड का स्टाल लगाते है | यह गरम गरम और बहुत स्वातिष्ठ होता है | सब्ज़ियों और मीट से बना थुपका अपने आप मे पूरा खाना मन जाता है |

दार्जिलिंग मे आपको कुछ नेपाल के स्वाद भी चख़ने को मिलेंगे जैसे आलू दम, मोमो , ालो मिमी थुपका ाड्डी | चावल से त्यार किया गया लोकल ड्रिंक टंगवा भी यहाँ मिलता है |

तो आईये दार्जिलिंग और पहाड़ो के साथ खाने का भी लुफ्त उठायें |

 

पारुल आनंद