National

'बुआ-भतीजा' आज लखनऊ में करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस, कर सकते हैं 'गठबंधन फॉर्मूले' की घोषणा

'बुआ-भतीजा' आज लखनऊ में करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस, कर सकते हैं 'गठबंधन फॉर्मूले' की घोषणा

लोकसभा चुनाव 2019 के औपचारिक शंखनाद से पहले ही सभी पार्टियों ने अघोषित तौर पर चुनावी बिगुल फूंक दिया है.  लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अब उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है और सभी राजनीतिक की बिसात पर अपना दावं चलने की तैयारी कर रहे हैं. यूपी में सियासी बाजी अपने नाम करने के लिए मायावती और अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के महागठबंधन की कवायदों को जोरदार झटका दिया है और यूपी में बसपा-सपा गठबंधन का अनौपचारिक ऐलान कर दिया है.

 समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती शनिवार दोपहर को एक साझा पत्रकार वार्ता करेंगे. माना जा रहा है इसमें लोकसभा चुनावों में महागठबंधन की सीटों को लेकर घोषणा हो सकती है. इस आशय की जानकारी शुक्रवार सुबह बसपा के महासचिव सतीश मिश्रा और सपा सचिव राजेंद्र चौधरी ने एक साझा बयान में दी. यह पत्रकार वार्ता शनिवार दोपहर शहर के पांच सितारा होटल में आयोजित होनी है.

हाल ही में दोनों दलों के नेताओं ने दिल्ली में भेंट कर लोकसभा चुनावों में महागठबंधन के स्वरूप पर चर्चा की थी. सूत्रों से मिडिया को मिली खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में से सपा और बसपा की योजना 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ने की है. इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को भी दो या तीन सीटें देने की चर्चा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट अमेठी और सोनिया गांधी की सीट रायबरेली पर महागठबंधन अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगा.

आज लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश और बसपा प्रमुख मायावती ताज होटल में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और सपा-बसपा गठबंधन को लेकर औपचारिक ऐलान भी. हालांकि, इससे पहले ही यूपी में महागठबंधन में सीटों को लेकर सहयोगियों में खींचतान की बात सामने आई है. सपा-बसपा ने भले ही राष्ट्रीय लोकदल को अपने साथ ले लिया हो, मगर आरएलडी सीटों के बंटवारे से नाखुश है. आरएलडी प्रमुख अजित सिंह ने कहा है कि उनकी पार्टी सपा-बसपा महागठबंधन का हिस्सा है, मगर अभी तक सीटों पर बात नहीं हुई है. 

अजित सिंह ने कहा कि कांग्रेस को लेकर सपा और बसपा फैसला करेगी कि उसे लोकसभा चुनाव के मद्देनदर गठबंधन में रखना है या नहीं. हालांकि, सूत्रों की मानें तो आरएलडी ने सपा-बसपा गठबंधन से 5 सीटों की मांग की है, जबकि सपा-बसपा गठबंधन आरएलडी को तीन सीटें देने को तैयार है. दरअसल, आरएलडी ने जिन पांच सीटों की मांग की है, वह हैं- हाथरस, कैराना, बागपत, मुज़फ़्फरनगर और कैराना. हालांकि, अभी तक सीटों पर पूरी तरह से सहमति नहीं बनी है. 

दरअसल, सीटों पर बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए दो दिन पहले जयंत चौधरी अखिलेश यादव से मिलने लखनऊ गए थे. वहां अखिलेश यादव ने उन्हें सीटों को लेकर भरोसा दिलाया है. बहराहल, शनिवार को होने वाले अखिलेश यादव और मायावती के साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयंत चौधरी प्रेस कांफ्रेंस में नहीं जाएंगे. बता दें कि शनिवार को लखनऊ में ताज होटल में अखिलेश यादव और मायवती साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी और महागठबंधन का औपचारिक ऐलान करेंगी.  

निषाद पार्टी को भी महागठबंधन में शामिल किया जा सकता है. 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी गठबंधन ने 73 सीटें जीती थीं और इस बार उसके नेता 73 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं.

बसपा-सपा और रालोद ने साथ मिलकर उपचुनाव लड़ा था जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर सीट और उप मुख्यमंत्री की फूलपुर सीट से सपा प्रत्याशियों को जीत मिली थी. जबकि कैराना सीट पर रालोद प्रत्याशी ने भाजपा से यह सीट छीनी थी. बसपा सुप्रीमो मायावती गुरुवार शाम दिल्ली से लखनऊ पहुंची. पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वह 15 जनवरी को अपने जन्म दिन के दिन महागठबंधन की साझा प्रेस कांफ्रेंस कर सकती है लेकिन अब जन्म दिन के तीन दिन पहले ही इस प्रेस कांफ्रेस का आयोजन किया जा रहा है.

अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि सपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मिलकर लोकसभा चुनाव में जीत का परचम लहराएंगे. उन्होंने कहा कि पिछले साल लोकसभा उप-चुनाव में हम साथ आए तो प्रदेश के मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री की सीट पर भाजपा चुनाव हार गई. इस बार भी हमारा गणित सटीक बैठेगा और भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ेगा. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश शुक्रवार को कन्नौज में ई-चौपाल में लोगों को संबोधित कर रहे थे.

सपा-बसपा का गठबंधन न सिर्फ कांग्रेस , बल्कि बीजेपी के लिए भी सिरदर्द है. कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के लिए झटके की बात को समझने के लिए लोकसभा चुनाव 2014 के वोट शेयर पर गौर करने की जरूरत होगी. दरअसल, 2014 में भले ही बसपा को एक भी सीट नहीं मिल पाई थी, मगर उसका वोट फीसदी सपा के करीब ही था. 

 2014 लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 80 में से 71 सीटें जीत कर सबको चौंका दिया था. उस वक्त 71 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने रिकॉर्ड करीब 42 फीसदी वोट हासिल किए थे. वहीं, समाजवादी पार्टी के खाते में करीब 22 फीसदी वोटों के साथ 5 सीटें आई थीं. 2014 में मायावती की बसपा को एक भी सीट नहीं मिल पाई थी, मगर उसके करीब 20 फीसदी वोट थे. वहीं, कांग्रेस ने रायबरेली और अमेठी की सीटें जीती थीं और उसने करीब 7 फीसदी वोट शेयर हासिल किए थे. 

खबर यह भी है कि मायावती और अखिलेश यादव के सपा-बसपा को लेकर औपचारिक ऐलान से पहले यूपी कांग्रेस की टीम भी दिल्ली में मैराथन बैठक करेगी और आगे की रणनीति पर चर्चा करेगी. कांग्रेस भी बसपा-सपा गठबंधन के मद्देनजर भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेगी और इसमें राज बब्बर और पीएल पुनिया शामिल होंगे.