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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों गुरु चेले की नींद उड़ाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस है : बसपा सुप्रीमो मायावती 

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों गुरु चेले की नींद उड़ाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस है : बसपा सुप्रीमो मायावती 

लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन का ऐलान कर दिया है. सबसे पहले बसपा सुप्रीमो मायवाती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और कहा कि मोदी-शाह के गुरु चेले की नींद उड़ाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस है. इस दौरान उन्होंने सीटों का ऐलान करते हुए कहा कि दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. रायबरेली और अमेठी की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई है.  उन्होंने कहा कि लखनऊ गेस्ट हाउस कांड से ऊपर जनहित है. दोनों ही नेता ताज होटल में यह वार्ता की.

बसपा सुप्रीमो मायवाती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और कहा कि मोदी-शाह के गुरु चेले की नींद उड़ाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस है. पहले 1993 में कांशीराम और मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन करके उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें में बड़ी सफलता मिली थी. मायावती ने स्पष्ट किया कि गेस्ट हाउस कांड से ऊपर उठते हुए हमने यह गठबंधन करने का फैसला लिया है. हमने देशहित में गेस्ट हाउस कांड को भुला दिया है. 25 साल बाद सपा-बसपा का गठबंधन बना है. यह गठबंधन बीजेपी जैसे घोर जातिवादी और सांप्रदायिक पार्टी से लड़ने के लिए बनी है. यह गठबंधन न केवल दो पार्टियों का गठबंधन है बल्कि बहुसंख्यक समाज का गठबंधन है.

भाजपा पर हमला बोलते हुए बसपा सुप्रीमो बहन जी ने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों गुरु चेले की नींद उड़ाने वाली अति महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस होने जा रही है. हमारी पार्टी बीएसपी ने अंबेडकर के देहांत के बाद उनके कारवां को गति प्रदान की है. हमनें उस कारवां को ऐतिहासिक सफलता भी दिलाई है. हम जातिवादी व्यवस्था के शिकार लोगों को सम्मान दिलाने का काम कर रहे हैं. हम पहले भी साथ आए थे और आज फिर चुनाव के लिए साथ आ रहे हैं. हमें उस दौरान भी चुनाव में सफलता मिली थी. इस बार भी हम सफल होंगे. हमारी मकसद सिर्फ बीजेपी जैसी सांप्रदायिक पार्टियों को सत्ता से बाहर रखने का है. 

बहन जी बोली, अब देश में जनहित को लखनऊ गेस्टहाउस कांड से ऊपर रखते हुए एक बार फिर हमनें उसी प्रकार की दूषित राजनीति को जड़ से हटाने के लिए एक साथ आने का फैसला लिया है. आज उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के सवा सौ करोड़ आम जनता बीजेपी के घोर चुनावी वादा खिलाफी के खिलाफ खड़े हैं. आज आम जनता बीजेपी के तानाशाही रवैये से खासे नाराज हैं. आज सपा और बसपा ने देशहित को ध्यान में रहकर एक जुट होने का फैसला किया है. हमारा गठबंधन नई राजनीतिक क्रांति की तरह होगी. 

उन्होंने कहा की बीएसपी-सपा के गठबंधन से आम जनता की उम्मीद जग गई है. यह गठबंधन सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ही नहीं है बल्कि यह गरीबों, महिनलाओं, किसानों, दलितों, शोषित और पिछड़ों को उनका हक दिलाने के लिए है. बीजेपी की गलत नीतियों और कार्य प्रणाली से जनता खासी दुखी है. अब इस पार्टी को सत्ता में आने का अधिकार नहीं है. हम उसे दोबारा सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं. 

सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को साथ न रखने पर मायावती ने कहा कि बीजेपी की तरह ही कांग्रेस की नीतियां भी भ्रष्ट हैं. बीजेपी और कांग्रेस दोनों के शासनकाल में भ्रष्टाचार हुए. कांग्रेस और बीजेपी दोनों की नीति एक जैसी ही भ्रष्ट है और काग्रेस के साथ जाने पर बसपा को वोट शेयर में नुकसान होता है. सपा-बसपा को कांग्रेस के साथ जाने से कोई खास फायदा होने वाला नहीं है. हमनें अपने अनुभव को ही तरजीह दी है.

कांग्रेस का साथ जाने से हमारे वोट शेयर पर बुरा असर पड़ता है. अगर हम इनके साथ नहीं जाते हैं तो हमारे पास वोट का शेयर ज्यादा रहता है. लिहाजा हमनें इस वजह से कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखा है. हालांकि हमारी पार्टी ने यह फैसला लिया है कि पूरे देश में कांग्रेस पार्टी या इस तरह की किसी भी अन्य पार्टी से गठबंधन करके चुनाव नहीं लड़ेगी जिससे हमारा वोट ही कट जाए. 

उन्होंने कहा कि आज बीजेपी के शासनकाल में अघोषित इमरजेंसी लगी हुई है. बीजेपी को इस बार कांग्रेस को हुई 1977 में हुए चुनाव की तरह ही बड़ा नुकसान होने वाला है. मायावती ने कहा कि बोफोर्स की वजह से कांग्रेस की सरकार गई थी, अब राफेल की वजह से बीजेपी की सरकार जाएगी. राफेल बीजेपी को ले डूबेगी.  मायावती ने कहा कि बीजेपी ने प्रदेश में बेईमानी से सत्ता हासिल की है. हमने गठबंधन में कांग्रेस को नहीं रखा. कांग्रेस या बीजेपी कोई आए, दोनों में एक ही बात है. 

मायावती ने कहा की कांग्रेस और बीजेपी की नीतियां एक जैसी है. दोनों सरकारों का हाल एक जेस ही रहे हैं. अगर हम कांग्रेस से गठबंधन करते हैं तो हमें घाटा होगा. क्योंकि कांग्रेस के समय में भी भ्रष्टाचार हुआ. मायावती ने कहा कि यूपी में बीजेपी ने बेइमानी से सरकार बनाई है. जनविरोधी को सत्ता में आने से रोकेंगे.  बीजेपी की अहंकारी सरकार से लोग परेशान है. जैसे हमने मिलकर उपचुनावों में बीजेपी को हराया है, उसी तरह हम लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराएंगे. 

कहा जाता है कि 1993 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद बसपा और भाजपा के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थीं. सपा को इसका अंदेशा हो गया था कि बसपा कभी भी सरकार से समर्थन वापस ले सकती है. 2 जून 1995 को मायावती अपने विधायकों के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक कर रही थीं. इसकी जानकारी जब सपा के लोगों को हुई तो उसके कई समर्थक वहां पहुंच गए. सपा समर्थकों ने वहां जमकर हंगामा किया। बसपा विधायकों से मारपीट तक की गई. मायावती ने इस पूरे ड्रामे को अपनी हत्या की साजिश बताया और मुलायम सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया. मुलायम सरकार के अल्पमत में आते ही भाजपा ने बसपा को समर्थन देने का पत्र राज्यपाल को सौंप दिया. अगले ही दिन मायावती राज्य की पहली दलित मुख्यमंत्री बन गईं.