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मंगल पर उतरा नासा का यान

मंगल पर उतरा नासा का यान

मंगल ग्रह की गुत्थियां सुलझाने के लिए नासा का रोबोटिक 'मार्स इनसाइट लेंडर' सोमवार की रात सफलतापूर्वक लाल ग्रह पर लैंड कर गया. ‘इनसाइट’ मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना पृथ्वी से कितनी अलग है, इसका पता लगाएगा. 

यह यान सोमवार-मंगलवार की रात भारतीय समयानुसार 1 बजकर 24 मिनट पर मंगल ग्रह की सतह पर पहुंचा. यह ग्रह की सतह पर उतरने के दौरान 19,800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से छह मिनट के भीतर शून्य की रफ्तार पर आ गया. इसके बाद यह पैराशूट से बाहर आया और अपने तीन पैरों पर लैंड किया. 

नासा ने इस यान को मंगल ग्रह के निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए और इस ग्रह से जुड़े नए तथ्यों का पता लगाने के लिए तैयार किया है. नासा का यह यान सिस्मोमीटर की मदद से मंगल की आंतरिक परिस्थितियों का अध्ययन करेगा. नासा के इस यान में 1 बिलियन डॉलर यानी 70 अरब रुपए का खर्च आया है. सौर ऊर्जा और बैटरी से ऊर्जा पाने वाले लैंडर को 26 महीने तक संचालित होने के लिए डिजाइन किया गया है. हालांकि नासा को उम्मीद है कि यह इससे अधिक समय तक चलेगा.

मंगल पर यान के उतरने के पहले सात मिनट सबसे ज्यादा खौफजदा थे. ये वह समय था जब इनसाइट मंगल के सघन वातावरण में हाइपरसोनिक स्पीड से प्रवेश कर रहा था और उसे अपनी गति घटाते हुए बैलगाड़ी की गति पर आना था. और फिर धीरे से मंगल की जमीन को चूमा. इस प्रोजेक्ट में नासा ने 993 मिलियन डॉलर का मोटा पैसा लगाया हुआ है. इसलिए ये चंद घंटे उनके लिए हाईवोल्टेज ड्रामा में बदलते जा रहे हैं. ये विमान मंगल पर आने वाले भूकंप, कंपन, रहस्यों और ये कैसे बना आदि ढेर सारे वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन करेगा. नासा ने इसे कोई सात महीने पहले मंगल की ओर रवाना किया था.इससे पहले नासा के क्यूरोसिटी रोवर ने मंगल की यात्रा की थी.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मार्स इनसाइट लेंडर मंगल के रहस्य खोलेगा. नासा का यह यान लाल ग्रह की जानकारियां पृथ्वी पर भेजेगा. जानकारी के अनुसार, यह यान ग्रह की आंतरिक संचरना का अध्ययन करने के लिए सिस्मोमीटर का उपयोग करने वाला है जिससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मंगल का निर्माण कैसे हुआ और यह पृथ्वी से इतना अलग क्यों है.

नासा के प्रशासक जिम ब्राइडेंस्टाइन ने रविवार को ट्वीट किया, ‘नासा दो दिनों के अंदर नासा इनसाइट के साथ मंगल पर उतर रही है. नासा के कर्मियों को धन्यवाद. इसे पूरा करते हैं और नया चरण शुरू करते हैं.’ इनसाइट मंगल ग्रह के बाहरी वातावरण में 19,800 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से प्रवेश करेगा और मंगल की धरती पर उतरने से पहले आठ किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार तक कम होगा. यह चरण सिर्फ सात मिनट के अंदर पूरा होना है.

नासा के पासाडेना स्थित ‘जेट प्रोपल्सन लैबोरेटरी’ में इनसाइट के ‘प्रवेश, मंदी और लेंडिंग’ (ईडीएल) प्रमुख रॉब ग्रोवर ने कहा, ‘यही कारण है कि इंजीनियर मंगल पर यान के उतरने की प्रक्रिया को ‘आतंक के सात मिनट’ बुलाते हैं.’

ग्रोवर ने कहा, ‘हम विमान के उतरने की प्रक्रिया पर नियंत्रण नहीं कर सकते, इसलिए हम अंतरिक्षयान में पहले से फीड किए गए निर्देशों पर निर्भर हो जाते हैं. अपनी योजनाओं का परीक्षण करने, मंगल पर अन्य यानों की लैंडिंग और मंगल से प्राप्त सभी जानकारियों को समझने में हमने सालों बिता दिए.’

नासा ने वर्ष 2007 में आर्कटिक मिशन को वहां भेजा था, इसमें जो हीटशील्ड, पैराशूट और रेट्रो रॉकेट्स का इस्तेमाल किया गया था, वही तकनीक इसमें भी दोहराई गई है. कैलिफोर्निया में मिशन कंट्रोल के इंजीनियरों को विश्वास है कि रिजल्ट अच्छे होंगे. इंजीनियरों का कहना है कि हमने इस लेंडर वो सब लगाया है, जिससे इसकी लेंडिंग बेहतर और स्मूथ हो सके. प्रोजेक्ट मैनेजर टॉम हाफमन कहते हैं, मंगल ऐसा ग्रह है, जो हमेशा आपके अनुसार व्यावहार नहीं करता. वैसे हमारी टीम तैयार है, हमारा स्पेसक्राफ्ट भी तैयार है लेकिन हमें नहीं मालूम कि मंगल इसके लिए कितना तैयार है.

इसकी लैंडिंग के दौरान कैलिफोर्निया के इंजीनियर बहुत नजदीकी से मंगल ग्रह के मौसम पर नजरें गड़ाए हुए हैं. वो वहां की धूल भरी आंधियों का आकलन कर रहे हैं और तेज हवाओं का अंदाज ले रहे हैं. दरअसल, ऐसे वातावरण इनसाइट की लैंडिंग को मुश्किल बना सकते थे. इनसाइट मानवविहीन है यानि उसके साथ कोई मानव नहीं बल्कि एक रोवर यानि रोबोट को भेजा गया है.