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ब्रह्मांड के बाहर पहुंचा न्यू होराइजंस, धरती से 4 अरब मील दूर पिंड की तस्वीर भेजी

ब्रह्मांड के बाहर पहुंचा न्यू होराइजंस, धरती से 4 अरब मील दूर पिंड की तस्वीर भेजी

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान न्यू होराइजंस एक जनवरी को ब्रह्मांड के बाहर पहुंच गया. भारतीय समयानुसार सुबह 11:03 बजे न्यू होराइजंस  सौरमंडल के बाहरी हिस्से कुइपर बेल्ट में स्थित अल्टिमा थूले नाम के पिंड के करीब से सफलतापूर्वक गुजरा. इसके बाद यान ने पृथ्वी से संपर्क साधा. जिस समय इस स्पेसक्राफ्ट से संपर्क हुआ, उस समय वह पृथ्वी से 6.5 अरब किलोमीटर दूर था.  यान ने वहां से तस्वीरें भी भेजीं.

2006 में लांच किया गया न्यू होराइजंस यान मंगलवार को अल्टिमा थुले के पास गुजरा था. कुछ घंटे बाद नासा को इसकी भेजी हुई तस्वीरें मिलीं. नासा के जिम ब्रिडेंस्टाइन ने कहा, ‘नासा की न्यू होराइजंस टीम, जांस हॉपकिंस एप्लाइड फिजिक्स लैबोरेटरी और साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट को एक बार फिर इतिहास रचने की बधाई.’ यान से मिले संकेतों से वैज्ञानिकों को पता चला है कि इसके सभी हिस्से सही तरीके से काम कर रहे हैं.

नासा ने न्यू होराइजंस द्वारा भेजी गई दो तस्वीरें साझा की हैं. न्यू होराइजंस ने यह तस्वीरें उस समय लीं जब अल्टिमा थुले से उसकी दूरी 3,500 किलोमीटर थी. तस्वीरों से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि अल्टिमा थुले की आकृति बाउलिंग पिन जैसी है, जिसका एक हिस्सा दूसरे के मुकाबले पतला है। इसका आकार करीब 32 गुणा 16 किलोमीटर है.

एक संभावना यह भी है कि दो छोटे पिंड एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे हों. साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के एलन स्टर्न ने कहा, ‘न्यू होराइजंस ने हमारी उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन किया.’ अल्टिमा थुले के अध्ययन से हमारे सौरमंडल से जुड़े कई राज खुलने की उम्मीद है. यह इस बात को समझने में भी मददगार हो सकता है कि सौरमंडल का निर्माण किस तरह हुआ. न्यू होराइजंस ने जितना डाटा जुटाया है, उस पूरे डाटा को धरती तक पहुंचने में 20 महीने से ज्यादा का वक्त लगेगा. 

भारत के श्याम भास्करन नासा के ऐतिहासिक फ्लाइबाय मिशन का हिस्सा हैं. भास्करन नासा की जेट प्रोप्लशन लैबरेटरी में काम करते हैं. मिशन में चुनौतियों पर भास्करन ने कहा कि यह आसान नहीं है, क्योंकि इससे पहले तक नासा किसी ऐसी चीज के पास नहीं गया, जिसके बारे में जानकारी ही नहीं थी. भास्करन ने बताया कि अल्टिमा थुले को ढूंढना ही अपने आप में चुनौती भरा काम होनेवाला था. हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि सौर मंडल की उत्पत्ति कैसे हुई. यह पहला मिशन है जिसमें कोई अंतरिक्ष यान सौरमंडल के बाहर गया है. भास्करन का जन्म 1963 को मुंबई के माटुंगा में हुआ था. 
 
अल्टिमा थूले एक लैटिन मुहावरा है जिसका अर्थ है दुनिया की जानकारी से परे. 01 जनवरी, 2019 को भेजी पहली तस्वीर, अंतिम मिलेगी सितंबर, 2020 में. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंतरिक्ष के आठ ग्रहों के आगे के विराट और अत्यंत ठंडे क्षेत्र में ही इस बात का राज छिपा है कि 4.5 अरब वर्ष पहले हमारा सौर परिवार किस तरह अस्तित्व में आया. 15,000 लोगों ने 34,000 नाम जमा किये थे अल्टिमा के नामकरण के लिए. 29 नाम बचे थे अंतिम चरण में अंत में अल्टिमा थूले का चयन 40 लोगों ने किया था प्रस्तावित.

अंतरिक्ष यान से भेजे गये रेडियो संदेश स्पेन के मैड्रिड में लगे नासा के एंटेना में पकड़े गये. इन संदेशों को पृथ्वी और अल्टिमा के बीच लंबी दूरी को तय करने में छह घंटे और आठ मिनट का समय लगा. सिग्नल रिसीव होते ही जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की लैबोरेटरी में जश्न मनाया गया.
कुइपर बेल्ट
 
सौर मंडल जहां सूर्य की रौशनी नहीं के बराबर पहुंचती है, उसे कुइपर बेल्ट कहा जाता है.  कुइपर बेल्ट में ही प्लूटो है. पूूरा कुइपर बेल्ट जमे हुए पिंडों से बना है. यहां अरबों की संख्या में छोटे-बड़े मलबे या पिंड मौजूद हैं. यहां तापमान बहुत कम है. वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचने के कारण यहां पर रासायनिक प्रक्रिया लगभग न के बराबर हुई है. अत: इन पिंडों पर उपस्थित तत्व अपनी मूल अवस्था में है. वैज्ञानिक वास्तविक तत्वों का अध्ययन करना चाहते हैं, जो बिग बैंग के बाद सूर्य से अलग होकर सौरमंडल में फैल गयी थी.