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पडोसी से बढ़ाये प्यार |

पडोसी से बढ़ाये प्यार |

आजकल एकल परिवार होते हुए , पडोसी ही परिवार होते जा रहे है | सच भी है , पड़ोस ही हमारा परिवार बन गया है | वो हमारे सुख दुःख का साथी बन गया है | हमारे परिवार के लोग तो दूर दराज मे रहते है ,लेकिन पड़ोस सबसे नज़दीक है | पड़ोस मे बसे परिवारों के साथ निबाह ज़रूरी कदम शिष्टाचार है | आत्मीयता के साथ ही बचपन मे मिला पाठ भी बच्चों को उम्र भर काम आएगा | निबोरस से मिलने पर अभिवादन और मदद करने पर आभार जताने की समझ बच्चों को अपने आसपास बसे परिवारों से गहरायी से जोड़ती है |

पॉजिटिव बिहैवियर की झलक उनको आगे जाकर उनकी ज़िन्दगी को अच्छे पहलू मे तब्दील करती है | थोड़ी समझदारी भी ज़रूरी है , की हमेशा अपने पडोसी को परेशान न करें | थोड़ा प्राइवेसी का भी ध्यान रखे | अगर आपके पडोसी कामकाजी है तो छुट्टी वाले दिन उनको पेरशान न करें | बच्चों को भी समझाए , की आंटी अंकल बिजी है |

सजग भी रहना अनिवार्य है | अभी हाल मे ही कुछ घटनाये ऐसी हुई है , जिसमे छोटे बच्चों के साथ दुर्व्यवहार हुआ है | इसलिए सचेत रहना भी अनिवार्य है | अपने बच्चे की ढीलढाल और बातचीत से पता लगाए की उनका व्यवहार कैसा है | अगर उनका व्यवहार ठीक नहीं है , तो अपने बच्चों को वहां जाने से रोके और उनके बाद बॉडी लैंग्वेज के बारे मे समझाए |

खुश रहे और सजग रहे , ज़िन्दगी आसान बन जायेगी |

पारुल आनंद