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धुम्रपान के अलावा एक और वजह बन रही हैं महिलाएं में कैंसर का कारण

धुम्रपान के अलावा एक और वजह बन रही हैं महिलाएं में कैंसर का कारण

कैंसर एक ऐसी जानलेवा बीमारी है, जो इंसान को अंदर से खोकला कर देती हैं। जिसका इलाज सही समय पर होना अत्यंत आवश्यक है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले कैंसर का सही समय पर पता ना चल पाए तो इसका इलाज असंभव है। अगर बात करे फेफड़ो के कैंसर की तो अक्सर, मरीजों में इसकी वजह अब तक स्मोकिंग को ही बताया गया हैं। लेकिन एक रिसर्च ने इस बात का खुलासा किया हैं कि धुम्रपान के अलावा प्रदूषण से भी कैंसर की बिमारी लोगों में देखने को मिल रही हैं। जिसमें खासकर महिलाएं फेफड़ों के कैंसर की मरीज बन रही हैं।

बेशक आप सिगरेट नहीं पीते हैं, तो भी कोई जरूरी नहीं कि आप सिगरेट के होने वाले नुकसान से सुरक्षित हैं। धूम्रपान के चलते फेफड़ों को जो नुकसान पहुंचता है, उतना ही प्रदूषण के चलते हो रहा है। दरअसल, इस बात का खुलासा गंगा राम अस्पताल और लंग केयर फाउंडेशन की 2012 से 2018 के दौरान मरीजों पर की गई रिसर्च में हुआ है। प्रदूषण का सबसे अधिक असर महिलाओं के फेफड़ों पर हो रहा है, जोकि चिंताजनक विषय है। 

वैसे तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर एक आम बात है। अब तक माना भी जाता रहा है कि महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों में ज्यादातर की वजह ब्रेस्ट कैंसर है। लेकिन हाल ही में आई एक रिसर्च ने इस धारणा को ध्वस्त करती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं के बीच फेफड़े के कैंसर की मृत्यु दर 2015 से 2030 के बीच 43 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसा 52 देशों के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है।

जर्नल कैंसर रिसर्च में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, सबसे ज्यादा फेफड़े के कैंसर की मृत्यु दर 2030 में यूरोप और ओशनिया में होगी, जबकि 2030 में सबसे कम फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर अमेरिका और एशिया में अनुमानित हैं।

स्पेन में इंटरनेशनल डी कैटालुन्या युनिवर्सिटी (यूआईसी बार्सिलोना) में सहायक प्रोफेसर जोस मार्टिनेज-सांचेज ने कहा, हमने वैश्विक स्तर पर स्तन कैंसर की मृत्यु दर को कम करने में बड़ी प्रगति की है, लेकिन महिलाओं में फेफड़े के कैंसर की मृत्यु दर दुनिया भर में बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि अगर, हम जनसंख्या में धूम्रपान के व्यवहार को कम करने के उपायों का क्रियान्वयन नहीं करते हैं तो फेफड़े के कैंसर की मृत्यु दर दुनिया भर में बढ़ना जारी रहेगी। बता दें, इस स्टडी में शोधकर्ताओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मृत्यु दर डेटाबेस से महिलाओं के स्तन और फेफड़ों के कैंसर की मृत्यु दर का विश्लेषण किया है।