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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'आयुष्मान भारत योजना' हटाने का किया ऐलान, भाजपा नेता दिलीप घोष ने घेरा 

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'आयुष्मान भारत योजना' हटाने का किया ऐलान, भाजपा नेता दिलीप घोष ने घेरा 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 'आयुष्मान भारत योजना' से हटने का फैसला करते हुए कहा कि राज्य अब योजना के लिए 40 पर्सेंट फंड नहीं देगा. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार इस योजना को चलाना चाहती है तो पूरा का पूरा पैसा उसे ही देना पड़ेगा. बताते चलें कि इस योजना को 25 सितंबर 2018 से देशभर में लागू किया गया है.  

वहीं, केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने इस बारे में केंद्र सरकार को लिखा है कि योजना से बाहर निकलने के बंगाल सरकार के फैसले को अधिसूचित किया जाए. ममता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य के योगदान की अनदेखी कर स्वास्थ्य योजनाओं का सारा श्रेय खुद ले रहे हैं. वह डाकघरों के माध्यम से बंगाल के लोगों को पत्र भेजकर इस योजना का क्रेडिट खुद को दे रहे हैं। इन पत्रों में मोदी की फोटो लगी है. जब इसका श्रेय वह खुद ले रहे हैं तो पैसे भी उन्हीं को देना चाहिए. 

ममता ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए डाकघरों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ममता ने कहा कि हमारे पास आयुष्मान योजना से भी बेहतर एक योजना आरोग्यश्री है. ममता ने कहा कि बंगाल में किसी को भी चिकित्सा के लिए पैसे चुकाने नहीं पड़ते. बिहार-झारखंड में भी ऐसा है. यहां तक कि नेपाल और बांग्लादेश में भी मुफ्त मेडिकल सुविधाएं मिलती हैं. ममता ने कहा, 'ऐसे में देश का प्रधानमंत्री डर्टी पॉलिटिक्स क्यों खेल रहा है?' 

योजना आयुष्मान भारत से बंगाल को अलग करने का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलान किया .  इस को लेकर शुक्रवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने तीखी टिप्पणी की और कहा कि दरअसल ममता पश्चिम बंगाल को अलग देश बनाना चाहती हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत सरकार की हर परियोजना से खुद को दूर कर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को पश्चिमी बांग्लादेश बनाने में जुटी हैं. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को देश या राज्य के विकास से कोई लेना-देना नहीं है. उन्हें अपना राजनीतिक स्वार्थ देखना है. दिलीप ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सड़क से लेकर शौचालय तक, नेशनल हाईवे से लेकर हफ्ता वसूली तक हर जगह ममता बनर्जी की तस्वीरें लगी हैं.  स्वच्छ भारत परियोजना को ममता ने निर्मल बांग्ला का नाम दे दिया है और हर जगह बनने वाले शौचालय के गेट पर उनकी बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगा दी गई है . 

बंगाल के जिलाधिकारी हर जगह घूम कर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बोर्ड पर ममता बनर्जी के नाम की पट्टी चस्पा रहे हैं, यह सब लोग देख रहे हैं . राज्यभर में जो भी काम होता है वह उन्हीं की प्रेरणा से हो रहा है.  इसीलिए हफ्ता वसूली से लेकर हत्या, अपराध और हर तरह के गैरकानूनी कार्य करने वाले उनकी तस्वीर लगा कर रखते हैं.  विकास के काम में प्रधानमंत्री की तस्वीर उनसे बर्दाश्त नहीं हो रही.

इसीलिए उन्होंने आयुष्मान भारत से राज्य सरकार का समर्थन वापस खींच लिया है.  दिलीप ने कहा कि इससे ममता बनर्जी को न तो कोई राजनीतिक लाभ होने वाला है और न ही भाजपा को कोई नुकसान.  गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलने की जो शुरुआत हुई थी, उससे पश्चिम बंगाल के लोग वंचित हो जाएंगे.  घोष ने आरोप लगाया कि ममता की राजनीति केवल और केवल पश्चिम बंगाल को विकास की योजनाओं से वंचित करने की है. उन्होंने मुख्यमंत्री के उस फैसले पर भी टिप्पणी की जो उन्होंने सभी विश्र्वविद्यालयों के कुलपतियों को प्रधानमंत्री के वीडियो कॉन्फ्रेंस में भागीदार नहीं बनने को लेकर लिया है. 

दरअसल आगामी 29 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर के सभी विश्र्वविद्यालयों के कुलपतियों से बात करेंगे लेकिन ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल का कोई भी विश्र्वविद्यालय इसमें भाग नहीं लेगा. इस बारे में पूछने पर दिलीप घोष ने कहा कि ममता का इरादा बंगाल को देश से अलग करने का है. जब तक वह सत्ता में हैं तब तक उनकी कोशिश है कि पश्चिम बंगाल को किसी भी तरह से पश्चिमी बांग्लादेश के रूप में तब्दील कर दिया जाए. इससे राज्य के लोगों को नुकसान हो रहा है. आने वाले चुनाव में लोग मतदान के जरिए उन्हें इसकी सजा देंगे.

आयुष्मान योजना के लिए केंद्र और राज्य के हिस्से का अनुपात 60:40 तय किया गया है. आयुष्मान भारत एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है जो 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराती है. पश्चिम बंगाल सरकार ने 2017 में ऐसी ही एक 'स्वास्थ्य साथी' योजना शुरू की थी. जो राज्य के लोगों को पेपरलेस और कैशलेस स्मार्ट कार्ड के आधार पर सुविधाएं देती है. बता दें कि ओडिशा, दिल्ली, केरल और पंजाब चार और ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने आयुष्मान योजना को नहीं अपनाया है.