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'बुआ-भतीजा' आए एक साथ, कांग्रेस से किया किनारा, यूपी में दिया 38-38 सीटों का फॉर्मूला

'बुआ-भतीजा' आए एक साथ, कांग्रेस से किया किनारा, यूपी में दिया 38-38 सीटों का फॉर्मूला

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने आज साझा प्रेस काफ्रेंस की. इसमें मायावती ने ऐलान किया कि उत्‍तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38 पर बसपा और 38 पर सपा लड़ेगी. साथ ही 2 सीटें अन्‍‍‍य पार्टियों के लिए रिजर्व रखी गई हैं. इसके अलावा अमेठी और रायबरेली की 2 सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ दी हैं. 

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती शनिवार दोपहर 12 बजे साझा प्रेस कांफ्रेंस संबोधित किया. आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शनिवार दोपहर राजधानी लखनऊ में पहला शंखनाद हुआ है जब वर्षों से एक-दूसरे की मुखालफत करने वाली सपा और बसपा एक मंच पर थे, मंच से सपा-बसपा के गठबंधन का ऐलान किया. प्रेस कांफ्रेंस पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिक गई हैं. इस दौरान मायावती ने कहा 'सपा और बसपा का गठबंधन एक स्थायी गठबंधन है. केवल 2019 ही नहीं बल्कि 2022 का आम विधान चुनाव भी हम साथ लड़ेंगे. 

बसपा प्रमुख मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन का ऐलान कर दिया. मायावती ने कहा- ‘‘राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से सपा और बसपा 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अमेठी (राहुल गांधी की सीट) और रायबरेली (सोनिया गांधी की सीट) को हमने कांग्रेस से गठबंधन किए बिना ही उसके लिए छोड़ दिया है ताकि भाजपा के लोग कांग्रेस अध्यक्ष को यहीं उलझाकर ना रख सकें. शेष दो सीटों पर अन्य पार्टियों को मौका देंगे.’’ कांग्रेस के गठबंधन में शामिल नहीं होने पर मायावती ने कहा- ‘‘कांग्रेस से गठबंधन करके हमें फायदा नहीं मिलता, बल्कि कांग्रेस को हमारे वाेट ट्रांसफर हो जाते हैं। हमारा वोट प्रतिशत घट जाता है.’’

मायावती ने कहा '25 साल बाद सपा और बसपा का गठबंधन बना है. आज यह प्रेस कांफ्रेंस पीएम मोदी और अमित शाह की नींद उड़ाएगी.' उन्‍होंने कहा कि उत्‍तर प्रदेश की जनता बीजेपी से त्रस्‍त आ गई है. इसलिए हमने गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है. जिससे किसी भी कीमत पर बीजेपी को केंद्र या राज्‍य की सत्‍ता पर आने से रोका जा सके.' उन्‍‍‍‍‍‍‍होंनेे कहा कि कांग्रेस के समय घोषित इमरजेंसी लगी थी, जबकि BJP के राज में अघोषित इमरजेंसी लगी हुई है. उन्‍होंंने कहा कि सपा-बसपा गठबंधन केंद्र में BJP को नहीं आने देगा.

सपा-बसपा के बीच 26 साल पहले भी गठबंधन हुआ था. 1993 में भी दोनों दल साथ आए थे. दो साल सरकार भी चली, लेकिन 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद गठबंधन टूट गया. तब लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में मायावती की मौजूदगी में सपा समर्थकों ने बसपा विधायकों से मारपीट की थी. इस घटना पर मायावती ने कहा- ‘‘गेस्ट हाउस कांड को किनारे करके देश हित और जन हित में हम सपा से गठबंधन कर रहे हैं. इस बार यह गठबंधन लंबा चलेगा. जब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होंगे, तब भी यह गठबंधन कायम रहेगा.’’

इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "ये आपसी दुश्मनों का गठबंधन (अलायंस ऑफ राइवल्स) है. न उनके वोटों में समानता है और न ही उनके उद्देश्य एक हैं. चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा ने भी गठबंधन किया था लेकिन बाद में उनके हित टकराने लगे. चुनाव कभी इस गणित पर नहीं जीता जाता. गिनना शुरू करिए तो एनडीए में पिछली बार 24 साथी थे, अब 35 हैं. जिसको वो (सपा-बसपा) लाभ समझते हैं उसके परिणाम को जनता कैसे समझती है, यह जल्द सामने आएगा. मतदाता को अपने साथ जोड़ने के लिए संगठन की आवश्यकता है. हम देश में अपने संगठन को मजबूत करेंगे. पिछली बार 282 सीटें आईं थी, कोई बड़ी बात नहीं कि इस बार ज्यादा सीटें आएं. जनता की हमसे उम्मीदें बढ़ गई हैं। बेहतर संगठन हमारे साथ है, इसमें कोई शक नहीं कि हम दोबारा सत्ता में आएंगे." जेटली ने कहा, "कांग्रेस का शहजादा हो, बंगाल की दीदी हो, आंध्रप्रदेश का बाबू हो, यूपी की बहनजी हो। सब दिल में इच्छा (प्रधानमंत्री बनने की) रखते हैं. सबकी तलवारें चुनाव के बाद निकलेंगी.''

पहले भी साथ आए थे बसपा-सपा
मुलायम सिंह यादव ने 1992 में समाजवादी पार्टी का गठन किया था. 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ. उस समय बसपा की कमान कांशीराम के पास थी. सपा 256 और बसपा 164 विधानभा सीटों पर चुनाव लड़ी. सपा को 109 और बसपा को 67 सीटें मिलीं. लेकिन 1995 में सपा-बसपा के रिश्ते खराब हो गए. इसी समय 2 जून 1995 को गेस्ट हाउस कांड के बाद गठबंधन टूट गया.